तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फ़ल पावै॥ हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें। https://garrettcipwc.total-blog.com/the-basic-principles-of-chalisa-48526519